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Thursday, June 4, 2026

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं: इतिहास, खोज और रोचक तथ्य

1. कालीबंगा सभ्यता (हनुमानगढ़) चूड़ियों का शहर और पहला जुता हुआ खेत

सिंधु घाटी सभ्यता का यह प्रमुख केंद्र राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर (प्राचीन सरस्वती) नदी के किनारे स्थित है। 'कालीबंगा' का अर्थ होता है — काले रंग की चूड़ियाँ

·         खोज और उत्खनन: इसकी खोज 1952 में अमलानंद घोष ने की थी। बाद में बी.बी. लाल और बी.के. थापर ने यहाँ खुदाई करवाई।

·         ब्लॉग के लिए यूनीक फैक्ट्स:

o    दुनिया का सबसे पहला जुता हुआ खेत यहीं मिला था।

o    यहाँ भूकंप के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिले हैं (दीवारों में दरारें)।

o    यहाँ लकड़ी को खोखला करके बनाई गई लकड़ी की नाली मिली है, जो दुनिया में अनूठी है।

o    इतिहासकार डॉ. दशरथ शर्मा ने इसे सिंधु साम्राज्य की 'तीसरी राजधानी' कहा है।

2. आहड़ सभ्यता (उदयपुर) ताम्रवती नगरी

उदयपुर के पास आयड़ (बेड़च) नदी के किनारे बसी यह सभ्यता ताम्रयुगीन (Copper Age) संस्कृति का एक बड़ा केंद्र थी। इसे 'ताम्रवती नगरी' या 'धूलकोट' (मिट्टी का टीला) भी कहा जाता है।

·         खोज और उत्खनन: इसकी खोज 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास ने की थी। बाद में आर.सी. अग्रवाल और एच.डी. सांकलिया ने इसका उत्खनन किया।

·         ब्लॉग के लिए यूनीक फैक्ट्स:

o    यहाँ ताँबा पिघलाने की भट्टियाँ मिली हैं, जिससे पता चलता है कि यहाँ के लोग धातु कर्म में एक्सपर्ट थे।

o    यहाँ 'उल्टे बनाई के मृदभांड' (काले और लाल रंग के मिट्टी के बर्तन) मिले हैं, जिन्हें 'गोरे और कोठे' कहा जाता था।

o    यहाँ एक घर में 6 चूल्हे मिले हैं, जो संयुक्त परिवार प्रणाली (Joint Family) की ओर इशारा करते हैं।

3. गणेश्वर सभ्यता (सीकर/नीम का थाना) ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी

कांतली नदी के उद्गम पर स्थित गणेश्वर सभ्यता को भारत में 'ताम्रयुगीन संस्कृतियों की जननी' (Mother of Copper Civilizations) माना जाता है। यह भारत की सबसे पुरानी ताम्रकालीन बस्तियों में से एक है।

·         खोज और उत्खनन: इसकी खोज और खुदाई 1977 में रत्नचंद्र अग्रवाल (R.C. Agarwal) ने की थी।

·         ब्लॉग के लिए यूनीक फैक्ट्स:

o    यहाँ से हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को ताँबा सप्लाई किया जाता था। यहाँ के ताँबे में 99% शुद्धता थी।

o    यहाँ मछली पकड़ने का ताँबे का काँटा मिला है, जिससे साबित होता है कि उस समय कांतली नदी में भरपूर पानी था और लोग मांसाहारी भी थे।

o    यहाँ मकान और बाँध बनाने में पत्थरों का उपयोग किया गया था, ईंटों का नहीं।

4. बैराठ सभ्यता (जयपुर/कोटपूतली-बहरोड़) मौर्य काल और महाभारत का केंद्र

बाणगंगा नदी के किनारे स्थित बैराठ (प्राचीन नाम विराटनगर) का संबंध महाभारत काल और मौर्य सम्राट अशोक, दोनों से है। महाभारत के अनुसार, पांडवों ने अपना अज्ञातवास यहीं के राजा विराट के महल में बिताया था।

·         खोज और उत्खनन: इसकी खोज 1936 में दयाराम साहनी ने की थी।

·         ब्लॉग के लिए यूनीक फैक्ट्स:

o    यहाँ से सम्राट अशोक का प्रसिद्ध 'भाब्रू शिलालेख' (Bhabru Edict) मिला, जिससे अशोक के बौद्ध धर्म के प्रति झुकाव का पता चलता है।

o    यहाँ गोलाकार बौद्ध चैत्य/मन्दिर के अवशेष मिले हैं, जो भारत में सबसे प्राचीन हैं।

o    यहाँ से सूती कपड़े में बंधी हुई 36 चांदी की पंचमार्क (आहत) मुद्राएं भी मिली हैं।

5. बालाथल सभ्यता (उदयपुर) हाथ से बुना कपड़ा और कंकाल

उदयपुर की वल्लभनगर तहसील में स्थित बालाथल सभ्यता का संबंध आहड़ संस्कृति से ही माना जाता है।

·         खोज और उत्खनन: इसका उत्खनन 1993 में वी. एन. मिश्र के नेतृत्व में हुआ था।

·         ब्लॉग के लिए यूनीक फैक्ट्स:

o    यहाँ भारत में कुष्ठ रोग (Leprosy) का सबसे पुराना प्रमाण (एक मानव कंकाल) मिला है।

o    बैराठ के बाद बालाथल ही वह स्थान है जहाँ से हाथ से बुने हुए सूती कपड़े के अवशेष मिले हैं।

o    यहाँ 11 कमरों का एक बड़ा भवन (दुर्ग जैसा) मिला है।

 

सभ्यता का नाम

जिला / नदी

खोजकर्ता

मुख्य विशेषता

कालीबंगा

हनुमानगढ़ / घग्घर

अमलानंद घोष

जुता हुआ खेत, भूकंप के साक्ष्य

आहड़

उदयपुर / बेड़च

अक्षय कीर्ति व्यास

ताम्रवती नगरी, संयुक्त परिवार

गणेश्वर

नीम का थाना / कांतली

आर. सी. अग्रवाल

ताम्रयुगीन जननी, मछली का काँटा

बैराठ

कोटपूतली-बहरोड़ / बाणगंगा

दयाराम साहनी

भाब्रू शिलालेख, बौद्ध मंदिर

 


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